जब भी लग्जरी कार्स की बात होती है तो लोगों के ध्यान में मर्सिडीज़ बेंज का नाम सबसे ऊपर आता है। तमाम सितारे इसकी सवारी करना अपनी शान समझते हैं। पर यह शुरू कब हुई और इस कार की कहानी क्या है?

आइये इस कार की हिस्ट्री जानने की कोशिश करते हैं, क्योंकि यकीनन यह बेहद दिलचस्प होगा।

मर्सिडीज बेंज की कहानी तकरीबन 120 साल पुरानी है। आप यह जानकर आश्चर्य करेंगे कि आज तक यह कार अपना ब्रांड और अपना नाम आखिर किस प्रकार बनाये रखने में सफल रही है?

बात 1883 की है जब बेंज नामक कंपनी रजिस्टर कराई गई और इसके पीछे थे कार्ल बेंज।

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आपको बता दें कि कार्ल बेंज को ही दुनिया का पहला ड्राइविंग लाइसेंस हासिल हुआ था।

पर इस कहानी में ट्विस्ट है। जिस समय कार्ल बेंज यह सब कर रहे थे, ठीक उसी समय के आसपास गॉटलिब डेमलर भी इसी तरह की टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे थे। हालांकि कार्ल बेंज ने थोड़ा पहले ही अपनी कंपनी को रजिस्टर करा लिया था।

लेकिन डेमलर ने भी अपने एक दूसरे साथी विल्हेम मेबाच के साथ DMG मोटर यानी Daimler-Motoren-Gesellschaft नामक कंपनी रजिस्टर की थी। उन्होंने भी एक इंजन का आविष्कार किया था।

दोनों का सफर अलग-अलग चल रहा था तभी फर्स्ट वर्ल्ड वार होता है और जर्मनी की इकोनॉमिक सिचुएशन पूरी तरह से डाउन हो जाती है। तमाम कंपनियां जर्मनी में तब बंद हो गई थीं, जबकि वेस्टर्न कंट्रीज में नई कंपनियां खुल रही थीं। यहीं पर बेंज और मेबाच साथ में मिलकर 1926 से दुनिया को कुछ नया देने निकल पड़े। तब इस कंपनी का नाम था ‘डेमलर बेंज’।

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इसके कुछ ही समय बाद इस कंपनी की mercedes-benz w15 कार ने लांच होते ही तहलका मचा दिया। उस वक्त इसकी तकरीबन 7000 गाड़ियां बिकीं थीं। द्वितीय विश्वयुद्ध में इस कंपनी ने हिटलर की सेना के लिए तमाम कारों की आपूर्ति की और कारों के साथ- साथ हथियार और एयरक्राफ्ट के भी इंजन और सबमरीन बनाए गए।

बाद में जब द्वितीय विश्व समाप्त हुआ तो 1946 में इस कंपनी द्वारा 170 वी मॉडल पेश किया गया।

फिर तो इस कंपनी ने इतिहास बनाना शुरू कर दिया। मर्सिडीज ने फिर दुनिया की पहली 36 हॉर्स पावर वाली कार बनाई जो बेहद पॉपुलर हो गई। और तब से मर्सिडीज़ बेंज का नाम रेसिंग कार की दुनिया में गूंजने लगा। उसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मर्सिडीज़ बेंज के लोगो की कहानी भी दिलचस्प है। इसमें जो डिजाइन है वह जमीन हवा और पानी की मोबिलिटी को सामने रखता है। जाहिर तौर पर इस कंपनी ने तीनों जगहों पर अपना डंका बजाया है।

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मर्सिडीज ने केवल नाम ही नहीं कमाया बल्कि इसने इनोवेशन के लेवल पर भी खासा काम किया है। इसने सबसे पहले डीजल इंजन के ट्रकों को पेश किया, तो 80 के दशक में ही इसने कम पोलूशन फैलाने वाले इंजन बनाने शुरू कर दिए थे।

बाद में एबीएस और एसपी सिस्टम भी सेफ्टी के लिहाज से मर्सिडीज ने ही सबसे पहले इस्तेमाल करना शुरू किया।

भारत की बात करें तो 1994 में इस कंपनी ने महाराष्ट्र के पुणे में मैन्युफैक्चरिंग स्टार्ट की और उसके बाद भारत में भी इस कंपनी में अपने झंडे गाड़ दिए।

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