आपकी गाड़ी में इंजन के बाद टायरों को गाड़ी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। गाड़ी की हैंडलिंग, माइलेज, बैलेंस तथा कंट्रोल आदि चीजें टायरों पर ही टिकी होती हैं।

जिस तरह आप अपनी कार की सर्विसिंग, धुलाई आदि सही समय पर कराते हैं, उसी तरह आपको गाड़ी के टायरों का भी ख्याल रखना चाहिए। आज हम आपको टायरों से सम्बंधित कुछ जरुरी चीजें बताएँगे-

टायरों के प्रकार
टायर दो किस्म के होते हैं- पहला ट्यूब टायर, दूसरा ट्यूबलेस टायर। आमतौर पर देखा जाता है कि छोटी गाडि़यों में अधिकतर ट्यूब टायर ही लगे होते हैं। ट्यूब टायर की कीमत ट्यूबलेस टायरों से कम होती है, लेकिन तथा ट्यूबलेस टायर के बहुत सारे फायदे भी होते हैं। जैसे: सड़क पर बेहतर ग्रिप, कंट्रोल, रखरखाव इत्यादि। ट्यूबलेस टायर में अगर पंक्चर हो जाये तो टायर की हवा धीरे-धीरे निकलती है और इमरजेंसी में आप उसे कुछ आगे तक ले जा सकते हैं।

टायरों को कब बदलना चाहिए
40 हजार किलोमीटर चलने के बाद आप अपनी गाड़ी के टायर्स बदल सकते हैं किन्तु अगर आपके गाड़ी के टायर की स्थिति अच्छी है तो आप उसे 50 हजार किलोमीटर तक बड़े आराम के साथ चला सकते हैं। हालाँकि ज्यादा पुराने टायर पर ड्राइव करना खतरनाक हो सकता है। टेक्नीकल बात करें तो कार के टायर की खांचे की बनी गहराई 1/6 मिमी हो जाए तो तुरंत ही टायर को बदल देना चाहिए। चाहे आपकी गाड़ी कम चली हो या ज्यादा सबको 5 साल के बाद उसे चेक करवाते रहना चाहिए। वहीं टायर को दस साल पूरे होने पर हर हाल में चेंज कर दें, बेशक वह कुछ हज़ार किलोमीटर ही क्यों न चली हो।

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कैसे करें टायर की देखभाल?
टायर प्रेशर को महीने में एक दिन अवश्य चेक कराएं और टायरों में हवा अधिक ना भरें, ना ही ज्यादा कम भरें। हवा एक समान रखें, अन्यथा टायर के जल्दी घिसने का खतरा रहता है। ध्यान रहें टायरों के ट्रेड में फंसे कील, कंकड़, पत्थर, कांटे, आदि को समय-समय में चेक कराते रहें, ताकि वह निकाले जा सकें। इसके अलावा कभी भी टायरों को केमिकल क्लीनर से साफ नहीं करना चाहिए ।

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अपसाइजिंग टायर का इस्तेमाल नहीं करें
कई लोग अपने कार में बिना साइज के टायर लगा देते हैं। कस्टमाईजेशन के नाम पर यह टायर बहुत चौड़े और मोटे होते हैं। इससे कार देखने में बहुत स्पोर्टी हो जाती है, साथ ही रोड पर इसकी ग्रिप भी बेहद अच्छी हो जाती है, परन्तु कार के माइलेज पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

कई कार कंपनियां अपसाइजिंग टायर लगाने के लिए सलाह नहीं देती हैं बल्कि कार में उसी तरह के टायर लगाए जाने चाहिए, जो ऑरिजनल साइज के हों। यह आपकी कार के लिए सही और परफेक्ट होते हैं।

पर अगर आप अपने कार पर अपसाइजिंग टायर लगाने की सोच ही रहे हैं तो सबसे पहले एक्सपर्ट का परामर्श लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि कई बार आपकी गाड़ी का पिकअप इससे डिस्टर्ब हो जाता है।

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टायर खरीदते समय सावधानियां
टायर खरीदते समय आपको विशेष सावधनियां बरतनी चाहिए क्योंकि सीजन के हिसाब से टायरों के मूल्य में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। मार्किट में अलग-अलग तरह की कंपनियों के टायर मिलते हैं और इनके दामों में काफी मोलभाव करने की गुंजाइश भी हो जाती है। याद रहे टायर खरीदने के लिए हमेशा मान्यता प्राप्त डीलर के पास जाकर खरीदने की कोशिश करें जो आपको पक्का बिल दे सके। ऐसे में टायर में किसी भी तरह की समस्या आ जाने पर आप आराम से बदल सकते हैं। वहीं आप टायर की मैन्युफैक्चरिंग डेट को देखना ना भूलें। एक साल से पहले बने टायर को बिलकुल भी मत खरीदें।

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