यदि आप किसी भी प्रकार के वाहन जैसे: कार, बाइक या कोई दूसरा वाहन बेच रहे हैं तो अपने वाहन को खरीदने वाले ग्राहक के नाम ट्रांसफर कराना नहीं भूलें। अगर गलती से भी वाहन दूसरे के नाम ट्रांसफर नहीं करवाया तो आप बहुत बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं।

कई बार ऐसा वाकया सामने आया है कि आपके द्वारा बेचा गया वाहन किसी प्रकार की अपराधिक गतिविधि में पकड़ा जाता है या एक्सिडेंट होने की स्थिति में आप पर कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में आप को लाखों रूपये का मुआवजा भी देना पड़ सकता है। इसलिए हम आपको बताएँगे कि वाहन बेचने के लिए क्या करें?

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वाहन बेचने के दौरान क्या होता है?

अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने वाहनों को बेच देते हैं और जो व्यक्ति खरीदता है वह बेचने वाले वाहन मालिक के नाम पर ही आराम से वाहन को चलाता रहता है। वहीं वाहन बेचने वाला व्यक्ति परिवहन विभाग में जाकर यह पता करना भूल जाता है कि वाहन खरीदने वाले व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर हुआ भी है या नहीं?

कई लोग सेंकड हैण्ड बाइक या कार को किश्त पर लेते हैं और कई किस्तों में पैसे को चुकाते हैं।
इसके साथ ही वाहन बेचने वाले व्यक्ति को पैसा एक साथ नहीं मिलता है और वाहन बेचने वाले व्यक्ति वाहन ट्रांसफर के फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं कर पाता है। इसके अलावा वाहन बेचने वाले तथा खरीदने वाले के बीच सिर्फ सेलडीड पर हस्ताक्षर होते हैं और जो व्यक्ति वाहन खरीदता है उसे सिर्फ मालिकाना अधिकार मिलता है ।

वाहन का रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर करवाएं

जिस प्रकार लोग जमीन और मकान को अपने नाम रजिस्ट्री कराने के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय जाते हैं। ठीक उसी प्रकार वाहन को बेचने के दौरान रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर करवाने के लिए आरटीओ (Road Transport Office) कार्यालय में जाना चाहिए । यदि आप ऐसा नहीं करेंगे तो बहुत बड़ी भूल व लापरवाही मानी जाएगी जिसके चलते आपको बहुत बड़ी परेशनियों से गुजरना पड़ सकता है।

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कानून के अनुसार
1. वाहन के बिक जाने पर अगर वाहन ट्रांसफर नहीं होता है तो आचनक सड़क हादसे हो जाने पर पंजीकृत मालिक ही पकड़ा जायेगा और उसे ही मुआवजा देना पड़ सकता है।

2. अगर वाहन को बेचने के दौरान जो व्यक्ति वाहन खरीदता है उनके नाम वाहन ट्रांसफर नहीं करने पर बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। जैसे : वाहन का दुर्घटना होने पर तथा आपराधिक घटना में पकड़े जाने पर वाहन के पुराने मालिक के खिलाफ कार्रवाई किया जाता है।

3. अगर आप वाहन बेचेंगे तो फार्म संख्या 29 व 30 (परिवहन विभाग) को तुरंत ही भरकर RTO ऑफ़िस में जाकर जमा करवाएं ताकि आप इन परेशानियों से बचें ।
4. इसके पश्चात एक महीने के अंदर वाहन ट्रांसफर हुआ या नहीं पता करने RTO ऑफ़िस जाना चाहिए।
5. यदि आपने जिसके पास वाहन बेचा है और उसने वाहन को ट्रांसफर नहीं कराया है ऐसे में उन्हें रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर के लिए कहें ।

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6. रजिस्ट्रेशन की मूल कॉपी, फार्म संख्या 29-30 पर वाहन बेचने वाले के साइन तथा विक्रय पत्र को लेकर RTO ऑफ़िस में जाकर सभी दस्तावेजों को जमा करवाना चाहिए ।
7. पूरी कार्रवाई होने के बाद वाहन खरीदने वाले के नाम का ट्रांसफर हो जाएगा तथा नए वाहन मालिक को स्मार्टकार्ड दी जाएगी ।

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